जो लौट नही सकते का हुआ मंचन
अहसास कलाकृति रंगमंडल के द्वारा पटना के कालिदास रंगालय में डॉ. प्रमोद कुमार सिंह,l लिखित एवं कुमार मानव निर्देशित हिंदी नाटक जो लौट नहीं सकते का मंचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन कर्ता श्री सत्यनारायण प्रसाद सेवानिवृत्त सहायक जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी पटना, मुख्य अतिथि श्री प्रमोद कुमार सिंह अधिवक्ता पटना उच्च न्यायालय एवं विशिष्ट अतिथि श्री एसपी गौतम निदेशक सह अध्यापक गौतम ब्राइट पब्लिक स्कूल के कर कमलों द्वारा किया गया।
इस नाटक में एक ऐसे युवक की कहानी को दिखाया गया है जो अपने पिता की मौत के बाद बचपन में ही एक व्यक्ति के साथ गांव से शहर काम करने आता है और कुछ ही महीनों बाद साथ लाने वालेआदमी की भी मौत हो जाती है वह युवक शहर में ही रह जाता है और मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पालते हुए किसी तरह गुजर बसर करता है। उसे अपने गांव के नाम के सिवा कुछ भी नहीं पता था। समय बीतने के साथ 25 वर्ष की अवस्था में उसे अचानक गांव घर एवं मां की याद आती है। वह अपने गांव जाने की ठान लेता है।लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी वह अपने गांव नहीं पहुंच पाता है और अपने परिवार एवं गांव से दूर भटक कर रह जाता है। ऐसे कितने ही लोग हैं जो किसी न किसी वजह से अपने परिवार और अपने घर से दूर हो गए हैं और अपने घर लौट नहीं सकते। ऐसे ही लोगों की कुंठा एवं दर्द के साथ किशन के साथ जुड़े नाटक के सभी पात्र समाज के यथार्थ का चित्रण करते हैं।
अपने अभिनय से रामेश्वर मिस्त्री के पात्र को जीवंत किया नाटक के निर्देशक कुमार मानव ने किशन की भूमिका में मंतोष कुमार ने उपस्थित दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। सिपाही की भूमिका में विजय कुमार चौधरी ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। अनारकली का किरदार निभा रही राधा कुमारी ने समाज के सच को उजागर किया। नाटक के अन्य पात्रों में राजू कुमार, भुनेश्वर कुमार, रविंद्र कुमार एवं हिमांशु कुमार ने भी दमदार अभिनय का परिचय दिया।प्रकाश परिकल्पना ब्रह्मानंद पांडे तथा एवं संगीत संयोजन मानसी कुमारी और रूप सजा माया कुमारी तथा मंच संचालन शिल्पी मित्रा ने किया।