ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

जो लौट नही सकते का हुआ मंचन

अहसास कलाकृति रंगमंडल के द्वारा पटना के कालिदास रंगालय में डॉ. प्रमोद कुमार सिंह,l लिखित एवं कुमार मानव निर्देशित हिंदी नाटक जो लौट नहीं सकते का मंचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन कर्ता श्री सत्यनारायण प्रसाद सेवानिवृत्त सहायक जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी पटना, मुख्य अतिथि श्री प्रमोद कुमार सिंह अधिवक्ता पटना उच्च न्यायालय एवं विशिष्ट अतिथि श्री एसपी गौतम निदेशक सह अध्यापक गौतम ब्राइट पब्लिक स्कूल के कर कमलों द्वारा किया गया।
इस नाटक में एक ऐसे युवक की कहानी को दिखाया गया है जो अपने पिता की मौत के बाद बचपन में ही एक व्यक्ति के साथ गांव से शहर काम करने आता है और कुछ ही महीनों बाद साथ लाने वालेआदमी की भी मौत हो जाती है वह युवक शहर में ही रह जाता है और मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पालते हुए किसी तरह गुजर बसर करता है। उसे अपने गांव के नाम के सिवा कुछ भी नहीं पता था। समय बीतने के साथ 25 वर्ष की अवस्था में उसे अचानक गांव घर एवं मां की याद आती है। वह अपने गांव जाने की ठान लेता है।लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी वह अपने गांव नहीं पहुंच पाता है और अपने परिवार एवं गांव से दूर भटक कर रह जाता है। ऐसे कितने ही लोग हैं जो किसी न किसी वजह से अपने परिवार और अपने घर से दूर हो गए हैं और अपने घर लौट नहीं सकते। ऐसे ही लोगों की कुंठा एवं दर्द के साथ किशन के साथ जुड़े नाटक के सभी पात्र समाज के यथार्थ का चित्रण करते हैं।
अपने अभिनय से रामेश्वर मिस्त्री के पात्र को जीवंत किया नाटक के निर्देशक कुमार मानव ने किशन की भूमिका में मंतोष कुमार ने उपस्थित दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। सिपाही की भूमिका में विजय कुमार चौधरी ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। अनारकली का किरदार निभा रही राधा कुमारी ने समाज के सच को उजागर किया। नाटक के अन्य पात्रों में राजू कुमार, भुनेश्वर कुमार, रविंद्र कुमार एवं हिमांशु कुमार ने भी दमदार अभिनय का परिचय दिया।प्रकाश परिकल्पना ब्रह्मानंद पांडे तथा एवं संगीत संयोजन मानसी कुमारी और रूप सजा माया कुमारी तथा मंच संचालन शिल्पी मित्रा ने किया।

Leave A Reply

Your email address will not be published.